रिटायर वन अधिकारी हूँ । कुछ कलम चलाने का शौक है ।कहानियां, कविताये,ग़ज़लें लेखन में कलम चलाई है,भोजपुरी कविताओं में भी भाग्य आजमाया है। "प्रतिलिपि" का अवलम्बन पा ज्ञानियों के मध्य कूद पड़ा हूँ । हश्र क्या होगा,खुदा ही जाने ?
सारांश
रिटायर वन अधिकारी हूँ । कुछ कलम चलाने का शौक है ।कहानियां, कविताये,ग़ज़लें लेखन में कलम चलाई है,भोजपुरी कविताओं में भी भाग्य आजमाया है। "प्रतिलिपि" का अवलम्बन पा ज्ञानियों के मध्य कूद पड़ा हूँ । हश्र क्या होगा,खुदा ही जाने ?
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