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अकेली चली

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अकेली चली                           --- सद्रे आलम ( प्रातः घाघरा घाट पर स्टीमर से पिया के घर जाती दुल्हन को देख कर हृदय में उमड़े भवनाओं की अभिव्यक्ति ) हो ओ ओ ओ ओ नाव में ...

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रिटायर वन अधिकारी हूँ । कुछ कलम चलाने का शौक है ।कहानियां, कविताये,ग़ज़लें लेखन में कलम चलाई है,भोजपुरी कविताओं में भी भाग्य आजमाया है। "प्रतिलिपि" का अवलम्बन पा ज्ञानियों के मध्य कूद पड़ा हूँ । हश्र क्या होगा,खुदा ही जाने ?

टिप्पण्या
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  • एकूण टिप्पणी
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    लता सिंह
    12 ଅପ୍ରେଲ 2020
    अब ऐसे दृश्य दुर्लभ लेकिन भावनाये वही है,सुंदर,👌
  • author
    विकास सी एस झा
    12 ଅପ୍ରେଲ 2020
    बहुत अच्छा लिखा आपने🙏
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    लता सिंह
    12 ଅପ୍ରେଲ 2020
    अब ऐसे दृश्य दुर्लभ लेकिन भावनाये वही है,सुंदर,👌
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    विकास सी एस झा
    12 ଅପ୍ରେଲ 2020
    बहुत अच्छा लिखा आपने🙏